Wednesday, September 24, 2014

पढ़ा लिखा गंवार


यूँ वो कोई अनपढ़ नही थी | बारहवीं क्लास पास थी | माँ पिता ने शादी कर दी | आगे पढने का सपना –सपना ही रह गया | पिछले तीन साल से उसका पति प्रशासनिक सेवा में जाने की तैयारी में लगा था और वो लगी रही अपने पति के हर सपने को पूरा करने में अपना मन मार पति को और आगे पढने बड़ा अफसर बनने के सपने के लिए उसने खुद को होम कर दिया | रात दिन पति की देखभाल में लगी रहती | पति के खाने –पिने ,कपड़े लत्ते से लेकर रिश्तेदारी की पूरी जिम्मेदारी उसने अपने नाजुक कन्धों पर उठा ली थी | | कई बार उसका भी मन क
रता वो भी अपने पति के साथ वेसा वक़्त बिताए जैसे और पत्नियाँ बिताती हैं | पर ये सब तो जैसे उसके लिए एक सपना सा था | जब भी पति के करीब जाने का मन होता देखती पति पढाई में व्यस्त है | वो ख़ामोशी से कदम दर कदम बस पति का साथ देती रही | आखिर उसके पति की मेहनत रंग लाई और उसका सिलेक्शन हो गया | साल भर की ट्रेनिंग के बाद ....बड़ी पोस्ट बड़ी जिम्मेदारी ...पहले अपनी पढाई के कारन वो पत्नी पर ध्यान नही दे पाता था और अब...अब उन्हें अपनी पत्नी को पत्नी बताने में शर्मिंदगी होने लगी | पत्नी के साथ कही आने जाने में शर्म का एहसास होने लगा पत्नी की कम पढ़ी लिखी होने का एहसास उसके करीब जाने से रोकने लगा | धीरे-धीरे वो अपनी पत्नी से दूर होते गए ...पर पत्नी अब भी उतनी ही निष्ठा और ईमानदारी से अपने कर्त्तव्य निभाती रही ...| कुछ दिनों बाद पता चला उन्होंने अपनी एक सहकर्मी के साथ रिलेशन बना लिए हैं | पढ़ी लिखी सहकर्मी के सामने पत्नी और फूहड़ और गंवार लगने लगी ...कोई बताए इनमे कौन ज्यादा एजुकेटेड साबित हुआ .....

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