आज
सुबह से ही वो अपनी डायरी को खोजने में जुटी थी।डायरी जिसमें कैद थी उसकी
तमाम आरजुएं,हसरतें,उसके आँसू,दर्द ,उसका बचपना…कितना कुछ जो सबसे छुपाकर
रखा था।
घर का कोना कोना छान मारा।डायरी कहीं नहीं मिली।वो रूवांसी सी होकर बैठ गई।
तभी बेटे ने कंधे पर हाथ रखा।क्या हुआ माँ ,क्यूं परेशान हो।कुछ नहीं मेरी डायरी नहीं मिल रही।वो तो रद्दी में बेच दी माँ।
फिर बेटे ने गळे से लगाते हुए कहा-माँ भूल जाओ अतीत की कङवाहट को।हम सब साथ हैं वर्तमान में जीयो ना।
उसे लगा बेटा सच कह रहा है।उसे यादों में जीना छोङ वर्तमान में जीना चाहिये और भविष्य को सुखद बनाने की कोशिश करनी चाहिये।उसने अपने आँसू पोछे और होंठों पर मुस्कुराहट बिखेरी।वो यादों में नहीं जियेगी।
घर का कोना कोना छान मारा।डायरी कहीं नहीं मिली।वो रूवांसी सी होकर बैठ गई।
तभी बेटे ने कंधे पर हाथ रखा।क्या हुआ माँ ,क्यूं परेशान हो।कुछ नहीं मेरी डायरी नहीं मिल रही।वो तो रद्दी में बेच दी माँ।
फिर बेटे ने गळे से लगाते हुए कहा-माँ भूल जाओ अतीत की कङवाहट को।हम सब साथ हैं वर्तमान में जीयो ना।
उसे लगा बेटा सच कह रहा है।उसे यादों में जीना छोङ वर्तमान में जीना चाहिये और भविष्य को सुखद बनाने की कोशिश करनी चाहिये।उसने अपने आँसू पोछे और होंठों पर मुस्कुराहट बिखेरी।वो यादों में नहीं जियेगी।
छोटे भी कहते बड़ी बात
ReplyDeleteअक्सर
वाह
क म मो
पिछले हफ्ते कुछ यूं हुआ कि बहुत पुरानी कविताओं का एक फोल्डर गलती से डिलीट हो गया और तमाम प्रयासों के बावजूद रिट्रीव नही हुआ ऐसे मे उस डायरी की बहुत याद आई जिससे कविताएँ कापी की थी पर कंहा मिलता है अतीत बस एक गहरी उदासी और अचानक आपकी पोस्ट शायद कुछ काम बने....
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