Friday, October 17, 2014

जाने कब तक
ठहरे
हमारी यादें
तेरे दिल के
दालान मैं ...
हम तो
चिरैया हैं
बस यादों के पंख
फैलाए
आ बैठे हैं
कभी दालान मैं
कभी सेहन मैं ...
हमारे पंखो को
सहेजना है
या कतरना
अब तुम ही
कर लो फ़ैसला ....
………नीता.…

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