ड्राइवर ने तेजी से बस को ब्रेक लगाए.बस के पहिये चरमराहट की आवाज़ करके दूर तक घिसटते चले गऐ.बस का तेज झटका लगने से उसका माथा आगे वाली सीट से जा टकराया ओर वो पीडा और दर्द से कराह उठी .ड्राइवर की तरफ़ उसने गुस्से से निगाह डाली.तभी उसकी नजर ड्राइवर के केबिन के उपर लगे आइने पर पडी.दो जोङी आँखे उसी को निहार रही थी।वो अपनी चोट और दर्द को कुछ पल के लिये भूल बेठी।हडबडाकर उसने अपनी नजर बस की खिडकी के बाहर घुमा ली।उसकी गोद का बच्चा कुनमुनाया।उसने धीमें से बच्चे को सहलाया।वो पसीने से लथपथ हो रही थी।समीप ही बच्ची उसकी गोद के बच्चे के पैरों पर सर रखकर सो रही थी।उसने आहिस्ता से उसका सर सरका कर उसे सही तरह से सुलाया।धीरे से उसकी नजर फिर आईने पर गई ।वो दो जोडी आँखे अब भी उसी पर टिकी थी।
--------------------------------------------------------उसने फ़िर हड़बडाकर नज़रे चुराई.गर्मी के उदास दिन और बस का लंबा उबाऊ सफ़र .उसे उकताहट होने लगी .तभी बच्ची कुन्मुनाई.उसने अपने पल्लू से बच्ची को हवा करी .तभी एक धचके से बस चल पडी.ना चाहते हुए भी उसकी नज़रे फ़िर उस आईने की तरफ़ उठ गई.वो एक जोडा आंखे अब भी उसी पर टिकी थी.उसने अचकचा कर नज़रे घुमाई.वो असहज महसूस करने लगी .ऐसा नही था की वो उन नज़रो को जानती नही थी.वो उस शख्स को पहचानती थी.पर उसका इस तरह देखना अजीब सा एहसास करा रहा था.तभी गोदी का बच्चा रोने लगा.उसने पलट कर हर तरफ़ निगाह फेरी ,कही उस बच्चे की मा नज़र आ जाए.बस मे मस्ती और शोरगुल हो रहा था.एक तरफ़ दूल्हा अपने दोस्तो के साथ गप्पे मार रहा था.कुछ लड़के -लड़कियां अन्ताक्षरी खेल रहे थे.कोई ऊंघ रहा था.ओह हां ,वो ये बताना तो भूल ही गई की वो अपने पडोसी लड़के की बरात मे जा रही थी.और दूल्हे के हर दोस्त को जानती थी.अब उसकी नजरे बच्चे की मा को तलाश कर ही रही थी के बस फ़िर रुकी .बच्चे का रोना तेज होता जा रहा था.दूसरी बच्ची भी रोने की आवाज़ से जाग गई थी.तभी बच्चे की मा ने आकर बच्चे को उसकी गोद से लिया .उसने राहत की सांस ली.उसके हाथ दर्द करने लगे थे.कुछ समय के लिये वो उन आंखो को भूल गई थी.पूरी बस खाली हो चुकी थी.सभी खाना खाने के लिये उतर गऐ थे.उसने खडे होकर अपने अस्त व्यस्त कपडे ठीक किये .तभी बच्ची बोली पानी पीना है .उसने चारों ओर नज़र दौडाई किससे कहे पानी लाने को.उसने खिड़की से बाहर झांका.सभी दूर नाश्ते की दुकान पर खडे थे.कोई चाय पी रहा है .कोई नाश्ता करने मे मश्गुल है .तो कोई सिगरेट के धुवे मे खोया है .तभी वही नज़रे नज़र आई .अब उसे बोलने के सिवा कोई और चारा ना था.उसने कहा पानी ला दो.गुडिया को प्यास लगी है .वो नज़रे मुस्कूराती हुई उसकी नजरो से ओझल हो गई.थोडी ही देर बाद वो पानी की बोतल और कुछ खाने की चीजे लेकर भागता हुआ आया और उसके हाथो मे थमा कर ,उसके कुछ कहने से पहले गायब हो गया .वो हाथ मे पेसे लिये उसके लौटने का इंतज़ार करती रही .शायद वो नही चाहता था की किसी को इस बात का पता चले.उसने गुडिया को पानी पिलाया और दोनो ने उसका लाया हुआ नाश्ता किया .तभी बस मे सारे बाराती लौटने लगे .पर वो नही लौटा जिसका उसे इंतज़ार था .
----------------------------------------------------------
बस अपने गनतव्य स्थल पर पहुच गई थी।पर वो एक बार भी नहीं दिखा।बस से उतरने के लिये वो जैसे ही खङी हुई।देखा पीछे की सीट पर बेठा वो उसी को देख रहा हे होंठों पर शरारती मुस्कान सजाए।वो चूपचाप बस से उतर गई।सभी अपना सामान थामे वहाँ चल दिये जहाँ बारात को ठहराया था।द्वार पर स्वागत की रस्म के बाद सारे बाराती उत्साह और कोलाहल के साथ आराम के मूड में आ गए।जलपान का दौर और बारातियों की आवभगत के बीच बारात में मौजूद लङकियाँ सजने संवरने के इंतजाम में लगी थी।वो इन सबसे दूर अकेली एक कमरेमें बेठी थी।बहुत शोरशराबा उसे पसंद नही।थोङा रिलेक्स होकर तैयार होकर जैसे ही कमरे से बाहर निकली,नजर सामने बाल्कनी में गई।ओह !कमरे मे लगे रोशनदान के शीशे से वो आँखे उसका पीछा करती रहीं और उसे भान भी नहीं हुआ।अजीब सी कुलबुलाहट होने लगी उसके मन में।उसने उन नजरों को नजरअदांज कर दिया।तभी बारात में मौजुद अन्य लडकियाँ उसे खींचकर ले गईं।दुल्हा घोङे पर सवार हो चुका था।उसके दोस्त अजीब अजीब तरह से डांस कर रहे थे।हर कोई मस्ती के मूड में था।बैंड पर आज मेंरे यार की शादी हे गाना बज रहा था।समां मस्ती का था।अब लङकियाँ कहाँ पीछे रहने वाळी थी।बेबी डॉल में सोने की …गाने पर लडकियाँ थिरक रहीं थी।नोट उबारे जा रहे थे।वो भी मुस्कुराती हुई आनंद ले रही थी।अचानक गाङी के तेज हॉर्न की आवाज से हङबङाकर वो पीछे हटी।गाडी हॉर्न बजाती हुई आगे नीकळने लगी।गाडी के आईने से वही आँखे उसकी आँखों से चार हुई।उसका दिल बहुत तेजी से धडकने लगा।बारात द्वार पर पहुँच गई।जयमाल के बाद दुल्हा दुल्हन स्टेज पर बैठ गए।उसे भी दुल्हे की भाभी ने जबरदस्ती स्टेज पर बेठा दिया।वहीं एक ओर दुल्हन को देनें वाला दहेज का सामान रखा था।जिनमें एक आलमारी और ड्रेसींग टेबल ,पलंग और अन्य सामान रखा था।साइड में डी,जे,की धून पर कुछ दोस्त थिरक रहे थे।दुल्हा दुल्हन को मिलने वाले गिफ्ट्स और लिफाफों को सम्भालते हुए अनायास नजर आलमारी पर पडी तो वो हकबका गई।आलमारी में लगे आईने से वही आंखे उसे निहार रही थी।कुछ पल के लिये उसे समझ नहीं आया वो क्या करे ।फिर वो उठकर दूसरी साइड जा बेठी।उसने देखा वो आँखे वहाँ से ओझल हो चूकी थी।उसने गहरी राहत की साँस ली।वैसे सच कहे तो उसे भी उसका इस तरह निहारना सुखद अनुभूति दे रहा था।पर वो ये जताना नहीं चाहती थी।अब रह रहकर उसकी नजरें उसे तलाश कर रहीं थी।पर वो ना जाने कहाँ गायब हो गया था।अब बैचेन होने की बारी उसकी थी।वो बडी ही बैचेनी से उसे तलाश करने लगी।पर वो तो जैसे एकदम गायब ही हो गया ।
-------------------------------------
वो बङी बैचेनी से अपनी नजरे चारों और फेरती रही।पर वो कहीं नजर नहीं आया।झुंझलाते हुए आखिर वो कुर्सी से उठ खङी हुई।स्टेज से नीचे उतरने को जैसे ही कदम बढाए तो नजर वहाँ रखी ड्रेसिंग टेबल पर पडी।आईने मे उसका अक्स नजर आया।उसका पारा सांतवे आसमान पर पहुंच गया।जिसके लिये वो इतनी बैचेन हे वो इस तरह बैठकर उसके मजे ले रहा हे कि वो तो उसे देख पाए पर पता भी ना चले।गुस्से में पैर पटकती वो वहाँ से रूम में चली आई।खुद को शांत किया।कपडे बदले ।गेट खोलकर जैसे ही बाहर नीकळी वो कान पकडे सर झुकाए बाल्कनी में खडा था।अब वो समझ नहीं पा रही थी क्या करे।वो अनदेखा करके वहाँ चल दी जहाँ दुल्हा दुल्हन खाना खाने बैठे थे।वो तुरंत उसके लिये कुर्सी ले आया।अब वो जानकर के दूसरी कुर्सी पर जा बेठी।वो कान पकडे उसके लिये खाने की प्लेट ले आया।उसकी इस हरकत पर उसे हंसी आ गई।उसने बडे प्यार से उसे खाना खिलाया।उसके दोस्तों ने उसका बडा मजाक बनाया।यार !तु बाराती हे।चल आ तु भी खाले।पर उसके खाना खाने के बाद ही वो खाना खाने बेठा।अब बारी आई फेरों की।वो दोनों इस तरह बैठे की एक दूसरे को सीधे ना देख पाएं।आईना जो था उनका मददगार।या कहें की उनके प्यार की इस आँख मिचोली का राजदार ,आईना ही था।अपने में सारे राज छुपाए वो इस पनपने वाले प्यार का मूक गवाह था।दोनों का ध्यान शादीमें नहीं बल्कि एक दूसरे को कनखियों से निहारने में था।पूरा वक्त यही खेल चलता रहा।गहराती रात के साथ उनका प्यार भी गहराता जा रहा था।सप्तपदीके फेरो के साथ जैसे उनका मन भी फेरे ले रहा था।एक नया उत्साह,उमंग मन में हिलोरे ले रहा था।अब आई बिदाई की बारी।उन्हें लगा जैसे वो ही बिदा हो रहें हो।क्यूं ये घडी इतनी जल्दी आ गई।काश् वक्त थोडा थम जाता।जानते थे बस जैसे ही दुल्हे के घर पहुँचेगी उन्हे जूदा होना पडेगा।ना कोई बात हुई अब तक ना इजहारे मोहब्बत ही हुई।पर नजर ही नजर में सात जन्मों के वादे हो गए।समय इस लुकाछिपी मे कैसे बीत गया पता ही ना चला ओर बस दुल्हे के घर पहुँच गई।एक शोर सा मच गया।दुल्हन की आगवानी में सब जुट गए।वो भी अपना सामान लेकर बोझिल मन से अपने घर की ओर चल दी।अब तक का सारा उत्साह खतम हो चुका था।
अगली सुबह मन में फिर एक उमंग थी।आज पार्टी में वो फिर उसे देख पाएगी।पूरा दिन उसने शाम के इंतजार में बिताया।शाम को बडी उमंगों के साथ उसने विशेष श्रंगार किया।आईने मे खुद को देखा तो खुद ही मुग्ध हो गई अपने आप पर।उसने पर्स में कुछ श्रंगार का सामान और एक छोटा सा आईना रख लिया।
पार्टी अपने पूरे यौवन पर थी।चारों तरफ कहकहे गुंज रहे थे।डी•जे•पर कुछ लडके थिरक रहे थे।कुछ मेहमान खाना खाने में लगे थे।कुछ स्टेज पर थे।बच्चे मस्तीयाँ कर रहे थे।आज फिर उसे दुल्हा दुल्हन के साथ स्टेज पर बैठना था।आज यहाँ कोई आईना नहीं था।उसकी नजरें हर ओर उसे तलाश रही थी पर वो कहीं नहीं था।वो उदास सी बैठी थी।मन कहीं नहीं लग रहा था।तभी वो सामने से आता दिखा।उसका
रोम रोम खिल गया।बदन में जान आ गई।चेहरा खुशी से दमकने लगा।
पर उसने एक बार भी उसकी तरफ नजर उठा के नहीं देखा। ऐसा किया जैसे जानता तक ना हो।उसे समझ नहीं आ रहा था आखिर वो ऐसा क्यो कर रहा हे।उसकी बैचेनी बढने लगी।वो भीड में ना जाने कहाँ गुम हो चुका था।वो इंतजार करके थक गई।फूल सा चेहरा कुम्हला गया ।तभी स्टेज पर दुलहन के लिये कॉफी लाई गई।वो जैसे ही पीने लगी कि हडबडी में उसके कपडों पर ढुल गई।वो दुलहन को लेकर उसका मेकअप और कपडे ठीक करने का बहाना करके स्टेज से उतरी। वहाँ से उतरकर उसने राहत की साँस ली।वो दोनों एक कमरे की तरफ बढे।वहाँ उसने दुलहन के कपडे साफ करे और मेकअप सही करने के लिये पर्स से सामान निकाला।आईना हाथ में लिया ही था कि बाहर से कुछ ठहाकों की आवाज आई।उसका ध्यान गया।यार ! आखिर तु शर्त जीत गया।घास नहीं डालती थी किसी को भी।आखिर तुने उसका घमंड तोड ही दिया।दोस्त उसकी पीठ थपथपा रहे थे।आईना उसके हाथ से गिरकर टूकडे हो चुका था और उसका दिल भी ……!!