Wednesday, September 24, 2014

नमक


नीरा अकेली ही जोर से हंस दी ।उसे यूँ हंसता देख आसपास बैठे सभी लोग उसे अचरज भरी निगाहों से देखने लगे।नीरा सभी को इस तरह अपनी ओर ताकता देख झेंप गई।उसे वो बात याद आ गई ।जब अमन ने उसे गहरी नींद से जगाया था।

मोटू ,ए सुन ना ।मझे भूख लगी हे ।अमन ने नीरा को जगाते हुए कहा ।
तो किचन में से लेकर खा लो ना।मुझे सोने दो ।नीरा करवट बदलते हुए बोली।
नहीं तुम लाओ।
यार क्या हे ।अब इस वक्त भूख लगी हे तुम्हे भी।टाईम देखो ना।रात के 2 बज रहें हैं ।मुझे सोने दो और तुम भी सो जाओ ।नीरा अमन को करीब खींचते हुए बोली।
नहीं मझे नींद नहीं आ रही ।कुछ बना दे ना मोटू ।अमन ने लाड जताते हुए नीरा को कंधे से फिर हिलाते हुए कहा।
ओहो तुम भी ना ।इस वक्तअन्डों के सिवा कुछ नहीं हे ।ऑमलेट बना देती हूँ।नींद से बोझिल पलकों को मिचमिचाते हुए नीरा किचन में घुस गई।
लो खा ओ ।अब में सो रही हूँ ।ऑमलेट की प्लेट अमन को पकडाते हुए नीरा ने सोने का उपक्रम करते हुए कहा ।
सुन ना ।बैठ ना मेंरे पास ।अमन नें नीरा
को करीब खींचा और ऑमलेट खाने लगा । दो कौर खाए और बोला-नीरू,
हम्म नीरा ने आँखे खोली।अब क्या हे ।जल्दी से खाओ ।फिर सोते हैं ना।
इसमे नमक तो डाला ही नहीं तुमने।
अरे ,डाला तो था ।कहते हुए नीरा ने खुद चखने को हाथ बढाया ।
रहने दो ।मैं यूंही खा लुगाँ ।
नीरा ने जैसे ही चखा।दौडकर वाशरूम भागी। अमन इतने नमक वाला तुम कैसे खा रहे हो।छोडो।
कैसे ना खाता मेरी मोटू ने इतने प्यार से जो बनाया है ! नीरा ने नींद के झोंके मे जरा ज्यादा ही नमक डाल दिया था ! और फिर दोनो बेसाख्ता खिलखिलाकर देर तक हंसते रहे ।

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