जब हवाओं में सिहरन हो
हल्की गुलाबी ठंड हो
हवाएं छू कर जाएं तेरी उड़ती जुल्फो को
तब याद करना तुम मुझे
मेरे साथ गुजरे वो पल
जब सर्द हवाओं ने
हाथ तेरा थामा था
और मेने
अपनी नर्म हथेली को
तेरे हाथों से छुआ दिया था
एक ही पल में
बिना देरी किये
तुमने कसकर जकड़ लिया था मुझे
अपनी बाहों में और
रख दीये थे
मेरे कापते लरजते होठों पर
अपने होठ
प्रीत की वो पहली मुहर
भूल मत जाना
भूल मत जाना प्रितम
हल्की गुलाबी ठंड हो
हवाएं छू कर जाएं तेरी उड़ती जुल्फो को
तब याद करना तुम मुझे
मेरे साथ गुजरे वो पल
जब सर्द हवाओं ने
हाथ तेरा थामा था
और मेने
अपनी नर्म हथेली को
तेरे हाथों से छुआ दिया था
एक ही पल में
बिना देरी किये
तुमने कसकर जकड़ लिया था मुझे
अपनी बाहों में और
रख दीये थे
मेरे कापते लरजते होठों पर
अपने होठ
प्रीत की वो पहली मुहर
भूल मत जाना
भूल मत जाना प्रितम
No comments:
Post a Comment