Wednesday, October 15, 2014

जब हवाओं में सिहरन हो
हल्की गुलाबी ठंड हो
हवाएं छू कर जाएं तेरी  उड़ती जुल्फो को
तब याद करना तुम मुझे 
मेरे साथ गुजरे वो पल
जब सर्द हवाओं ने 
हाथ तेरा थामा  था
और मेने 
अपनी नर्म हथेली को
तेरे हाथों से छुआ दिया था
एक ही पल में 
बिना देरी किये 
तुमने कसकर जकड़ लिया था मुझे 
अपनी बाहों में और
रख दीये थे 
मेरे कापते लरजते होठों पर 
अपने होठ
प्रीत की वो पहली मुहर
भूल मत जाना 
भूल मत जाना प्रितम

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