Wednesday, September 24, 2014

एक अदद तस्वीर



शाम गहराती जा रही थी.सूरज अपनी लालिमा के साथ अस्ताचल को चला था.उसके दिल मे भी शाम के साथ अंधियारे घिरते जा रहे थे । डूबते सूरज के साथ उसका दिल भी डूबता जा रहा था । किसे और केसे कहे अपनी बैचेनी । चारों ओर गहन अंधकार के सिवा कुछ भी नजर नहि आ रहा था । वो एक गहरी सोच में डूब गई । उसने कमरे में नजर दौङाई । पूरा घर उसकी मुस्कुराती तस्वीरों से भरा पङा है । हर कमरा उसकी मुस्कुराहटों और कहकहों से महकता था । आज वहाँ सिर्फ तस्वीरें गुलजार हैं । सिर्फ तस्वीरें । पर क्या सच में वो है अब भी…इन तसवीरो से इतर …या उसका अस्तित्व अब सिर्फ इन तस्वीरों में ही बचा था । वो उठी और अपनी अटैची पैक करने लगी । वो सिर्फ एक तस्वीर बन कर नहीं जियेगी ।

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