शाम गहराती जा रही थी.सूरज अपनी लालिमा के साथ अस्ताचल को चला था.उसके दिल मे भी शाम के साथ अंधियारे घिरते जा रहे थे । डूबते सूरज के साथ उसका दिल भी डूबता जा रहा था । किसे और केसे कहे अपनी बैचेनी । चारों ओर गहन अंधकार के सिवा कुछ भी नजर नहि आ रहा था । वो एक गहरी सोच में डूब गई । उसने कमरे में नजर दौङाई । पूरा घर उसकी मुस्कुराती तस्वीरों से भरा पङा है । हर कमरा उसकी मुस्कुराहटों और कहकहों से महकता था । आज वहाँ सिर्फ तस्वीरें गुलजार हैं । सिर्फ तस्वीरें । पर क्या सच में वो है अब भी…इन तसवीरो से इतर …या उसका अस्तित्व अब सिर्फ इन तस्वीरों में ही बचा था । वो उठी और अपनी अटैची पैक करने लगी । वो सिर्फ एक तस्वीर बन कर नहीं जियेगी ।
Clouds come floating into my life, no longer to carry rain or usher storm, but to add color to my sunset sky ― Rabindranath Tagore
Wednesday, September 24, 2014
एक अदद तस्वीर
शाम गहराती जा रही थी.सूरज अपनी लालिमा के साथ अस्ताचल को चला था.उसके दिल मे भी शाम के साथ अंधियारे घिरते जा रहे थे । डूबते सूरज के साथ उसका दिल भी डूबता जा रहा था । किसे और केसे कहे अपनी बैचेनी । चारों ओर गहन अंधकार के सिवा कुछ भी नजर नहि आ रहा था । वो एक गहरी सोच में डूब गई । उसने कमरे में नजर दौङाई । पूरा घर उसकी मुस्कुराती तस्वीरों से भरा पङा है । हर कमरा उसकी मुस्कुराहटों और कहकहों से महकता था । आज वहाँ सिर्फ तस्वीरें गुलजार हैं । सिर्फ तस्वीरें । पर क्या सच में वो है अब भी…इन तसवीरो से इतर …या उसका अस्तित्व अब सिर्फ इन तस्वीरों में ही बचा था । वो उठी और अपनी अटैची पैक करने लगी । वो सिर्फ एक तस्वीर बन कर नहीं जियेगी ।
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